कबीर साहेब की लीलाए
🌸नीरू-नीमा को कमल के फूल पर मिले🌸 काशी शहर में रहने वाले ब्राह्मण गौरीशंकर व सरस्वती निःसंतान दंपत्ति थे। गौरीशंकर भगवान शिव का उपासक था तथा शिव पुराण से भगवान शिव के गुणगान किया करता।गौरीशंकर निर्लोभी था तथा जो कथा से पैसे आते थे उन्हें धर्म मे लगाया करता था। सारे ब्राह्मण उनकी प्रशंसा करते थे। जिस कारण से वो पूरी काशी में प्रसिद्ध थे।अन्य स्वार्थी ब्राह्मण उनसे ईर्ष्या करने लगे था कुछ मुशलमनो की मदद से उन्हें मुसलमान बन दिया गया था। उनका नाम गौरीशंकर से नूर अली (नीरू) व सरस्वती से नियामत(नीमा) रखा गया। उनका गंगा में इस्नान करना बंद कर दिया। इसलिए वह एक लहर तारा नाम के सरोवर में इस्नान करने जाने लगे। उस तहब मे 2 कमल के बड़े बड़े फूल थे। निःसंतान होने की वजह से वह विलाप कर रहे थे। तभी आसमान से तेज़ रोशनी आई जो एक कमल के फूल पर गिरी। कबीर परमेश्वर एक शिशु के रूप में कमल पर सो रहे थे नीमा ने बचे को देखा ओर सीने से लगा लिया भगवान शिव जी को बहुत बहुत धन्यवाद दिया। वो बच्चे को घर ले आये। शिशु कबीर जी का नामांकन नीरू-नीमा को मुसलमान बनवाने की वजह से काज़ी शिशु का नाम करन के लिए आये। काजियों मे...