यज्ञ में शंख बजाना द्वापर युग में कबीर परमेश्वर की दया से पांडवों का अश्वमेध यज्ञ संपन्न हुआ। पांडवों की अश्वमेघ यज्ञ में अनेक ऋषि, महर्षि, मंडलेश्वर उपस्थित थे यहां तक कि भगवान कृष्ण भी उपस्थित थे फिर भी उनका शंख नहीं बजा। कबीर परमेश्वर ने सुदर्शन सुपच वाल्मीकि के रूप में शंख बजाया और पांडवों का यज्ञ संपन्न किया। गरीबदास जी महाराज की वाणी में इसका प्रमाण है "गरीब सुपच रुप धरि आईया, सतगुरु पुरुष कबीर, तीन लोक की मेदनी, सुर नर मुनि जन भीर" Visit:- Www.jagatgururampalji.org