✳️नानक देव जी की कथा✳️



आदरणीय नानक देव जी पश्चिम पाकिस्तान गाव तलवंडी पिता का नाम कालू राम मेहता(अरोरा) के घर जन्म हुआ। नानक देव जी के पिता जी पेशे से पटवारी थे। नानक देव जी बहुत पूण्य आत्मा थी सत गर्न्थो में उनके दो पिछले जन्मों के बारे में भी जानकारी दी गयी है। सतयुग में नानक देव जी की आत्मा राजा अम्बरीष थे,त्रेतायुग में राजा जनक थे। नानक देव जी एक सुल्तानपुर के एक नवाब के घर नोकर लगे। श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 4 श्लोक 32 में कहा है कि वह परमात्मा स्वम आकर ही वो ज्ञान बताता है।उस तत्वज्ञान को समझने के बाद गीता अध्याय 7 श्लोक 29 में कहा है कि जो व्यक्ति मेरे इस ज्ञान को समझ लेता है।


नानक देव जी को जिंदा बाबा के रूप में कबीर देव मिले


नानक साहेब जी की बहन नानकी का विवाह सुल्तानपुर में हुआ उनके पति का नाम जय राम जी थे।उन्होंने नानक जी सुल्तानपुर के एक नवाब के घर नोकरी दिलाई नानक जी वही रहने लगे और उनके दो पुत्र हुए लख्मी चंद ओर श्री चंद। सुल्तानपुर के वह बेई नदी थी सब नगर वासी वही स्नान करने जाते थे।प्रतिदिन नानक साहेब जी भी वही नहाने जाते थे।बेई नदी के वह उन्हे जिंदा बाबा के रूप में परमेश्वर(कविर देव) मिले। उन्होंने तत्वज्ञान के बारे में बताया और बताया कि जब तक सार नाम नही मिलता मोक्ष नही होता। उनको 3 दिन के लिए सतलोक(सत धाम ) लेकर गए।
तत्वज्ञान समझाया। ओर नाम दिया।

नानक देव जी की वाणी में प्रमाण:-

हम सुल्तानी नानक तारे,दादू को उपदेश दिया।
जात जुलाहा भेद न पाया,वो काशी माही कबीर हुआ।।

अनंत कोटि बृह्मांड का एक रति नही भार।
सतगुरु पुरुष कबीर है,कुल के सिरजन हार।।

नानक देव जी ने बताया है कि गुरु बिन मोक्ष नही होता गुरु बनाना आवश्यक है।


अधिक जानकारी के लिए देखे साधना tv शाम 7:30 से 8:30 तक।

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www.jagatgururampalji.org

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